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स्वामी विवेकानंद जयंती 2026 उज्जैन (मध्य प्रदेश) में शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाएगी। यह दिन भारत के महान संन्यासी, राष्ट्रचेतना के जाग्रत स्वर और युवाओं के प्रेरणास्रोत Swami Vivekananda की 163वीं जयंती के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।

यद्यपि अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था, लेकिन सनातन परंपरा में उनकी जयंती पौष मास की कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इसी कारण जयंती की तिथि हर वर्ष बदलती रहती है।

स्वामी विवेकानंद जयंती क्या है?

स्वामी विवेकानंद जयंती वह पावन दिन है, जब उनके जन्म की स्मृति हिंदू चंद्र पंचांग के अनुसार मनाई जाती है। यह जयंती यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति में महापुरुषों का स्मरण खगोलीय व तिथिगत गणना के आधार पर किया जाता है, न कि केवल ग्रेगोरियन तारीखों से।

इसी कारण स्वामी विवेकानंद जयंती, रवींद्रनाथ टैगोर जयंती या गांधी जयंती की तरह निश्चित तारीख पर नहीं आती।

स्वामी विवेकानंद जयंती 2026: तिथि व पंचांग (उज्जैन)

  • जयंती तिथि: शुक्रवार, 9 जनवरी 2026
  • तिथि: कृष्ण पक्ष सप्तमी
  • स्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश
  • अवसर: स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती

सप्तमी तिथि का समय (उज्जैन)

  • सप्तमी प्रारंभ: 9 जनवरी 2026, सुबह 07:05 बजे
  • सप्तमी समाप्त: 10 जनवरी 2026, सुबह 08:23 बजे

नोट: सभी समय उज्जैन के स्थानीय समय के अनुसार हैं। पंचांग में दिन की गणना सूर्योदय से होती है।

12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों?

हालाँकि स्वामी विवेकानंद जयंती हिंदू पंचांग से तय होती है, लेकिन भारत सरकार ने वर्ष 1985 से 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

इसका उद्देश्य था:

  • युवाओं में आत्मविश्वास जगाना
  • राष्ट्रनिर्माण की भावना मजबूत करना
  • स्वामी विवेकानंद के विचारों को आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाना

इस प्रकार:

  • 9 जनवरी 2026: स्वामी विवेकानंद जयंती (हिंदू कैलेंडर)
  • 12 जनवरी 2026: राष्ट्रीय युवा दिवस (अंग्रेज़ी कैलेंडर)

स्वामी विवेकानंद का जीवन और दर्शन

स्वामी विवेकानंद (1863–1902 ई.) भारत के उन विरले संतों में थे जिन्होंने वेदांत दर्शन को विश्वमंच पर प्रतिष्ठित किया। वे श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और उन्होंने कर्म, सेवा व अध्यात्म के समन्वय को जीवन का आधार बताया।

प्रमुख योगदान

  • रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना
  • बेलूर मठ को आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया
  • 1893 के शिकागो धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व
  • “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” का अमर संदेश

उनके विचार आज भी भारत की आत्मा और युवाओं की दिशा तय करते हैं।

स्वामी विवेकानंद जयंती का महत्व

  • युवाओं में राष्ट्रभक्ति और आत्मबल का संचार
  • सनातन धर्म और वेदांत की आधुनिक व्याख्या
  • सेवा, त्याग और आत्मचिंतन की प्रेरणा
  • उज्जैन जैसे आध्यात्मिक नगर में विशेष सांस्कृतिक महत्व

स्वामी विवेकानंद जयंती 2026 हमें यह स्मरण कराती है कि भारत की सच्ची शक्ति उसकी जाग्रत चेतना और युवा ऊर्जा में निहित है। चाहे यह जयंती 9 जनवरी को मनाई जाए या 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में, स्वामी विवेकानंद का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1.स्वामी विवेकानंद जयंती 2026 कब है?

स्वामी विवेकानंद जयंती शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

2.हर साल 12 जनवरी को ही जयंती क्यों नहीं होती?

क्योंकि जयंती कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि पर आधारित होती है, न कि अंग्रेज़ी कैलेंडर पर।

3.राष्ट्रीय युवा दिवस और जयंती में क्या अंतर है?

राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को मनाया जाता है, जबकि जयंती हिंदू पंचांग से तय होती है।

4.स्वामी विवेकानंद का जन्म कहाँ हुआ था?

उनका जन्म कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था।

5.स्वामी विवेकानंद ने कौन-कौन से संस्थान स्थापित किए?

रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन और बेलूर मठ।

 

 

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