आज की अहम झलकियाँ
- रविवार तड़के भस्म आरती में बाबा महाकाल का शांत और तेजस्वी स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्रकट हुआ।
- भस्म लेप के साथ सूर्य-चिह्न, चंद्र आकृति और त्रिनेत्र का विशेष अलंकरण आकर्षण का केंद्र रहा।
- महाकालेश्वर मंदिर में भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की गई।
उज्जैन, मध्य प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के सम्पन्न भस्म आरती के दौरान जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, श्रद्धालुओं के सामने बाबा महाकाल का अत्यंत शांत, गंभीर और तेजस्वी स्वरूप प्रकट हुआ।
आज के दर्शन में ज्योतिर्लिंग पर भस्म लेप के साथ-साथ सूर्य-चिह्न, चंद्र आकृति और त्रिनेत्र का विशेष अलंकरण स्पष्ट रूप से उभरा, जिसने पूरे गर्भगृह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
पुष्प-श्रृंगार ने बढ़ाई महाकाल की दिव्यता
आज के श्रृंगार में बाबा महाकाल को गेंदा, गुलाब और श्वेत पुष्पों की घनी मालाओं से सजाया गया।
मस्तक पर सजे पुष्प-मुकुट और नीचे रजत आधार ने ज्योतिर्लिंग के स्वरूप को और अधिक भव्य बना दिया।
नेत्रों की सौम्य दृष्टि और शांत मुखमंडल को देखकर श्रद्धालु भावविभोर होते नजर आए।
मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुई भस्म आरती
भस्म अर्पण के बाद ज्योतिर्लिंग के चारों ओर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इसके पश्चात फल-मिष्ठान का भोग अर्पित हुआ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती सम्पन्न की गई।
रविवार होने के कारण भस्म आरती दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिली।
भस्म आरती से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल साकार रूप में दर्शन देते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
आज के दर्शन ने इस आस्था को एक बार फिर दृढ़ किया।
प्राचीन इतिहास, सांस्कृतिक दृष्टिकोण, आध्यात्मिक यात्राओं और दुनियाभर की ताज़ा ख़बरों के लिए सबसे पहले विज़िट करें mahakaltimes.com/hi।



