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आज की अहम झलकियाँ

  1. रविवार भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु प्राप्त हुआ।
  2. रजत मुकुट, भांग–चंदन और पुष्पमालाओं से भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया।
  3. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने तड़के मंदिर पहुंचकर भस्म आरती के दर्शन किए।

उज्जैन, मध्य प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के सम्पन्न हुई भस्म आरती के दौरान गर्भगृह के पट खुलते ही बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य राजा स्वरूप श्रद्धालुओं के सामने प्रकट हुआ। अलौकिक श्रृंगार और जागृत स्वरूप ने उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया।

परंपरा के अनुसार, पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर व फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक सम्पन्न कराया गया।

रजत मुकुट और भांग-चंदन से सजा राजा स्वरूप

रविवार के विशेष श्रृंगार में भगवान महाकाल को रजत मुकुट, भांग-चंदन का लेप, रजत त्रिपुण्ड और पारंपरिक आभूषण अर्पित किए गए।

ज्योतिर्लिंग पर बने सजीव नेत्र, श्वेत मूंछें और लाल अधरों ने बाबा के राजसी स्वरूप को और प्रभावशाली बना दिया।

गुलाब, गेंदा और बैंगनी पुष्पों की भारी मालाओं से संपूर्ण श्रृंगार किया गया, जिसने गर्भगृह को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।

कपूर आरती के बाद सम्पन्न हुई भस्म रमाने की विधि

कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरागत विधि से भस्म रमाई गई

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए।

फल, ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग भी भगवान को अर्पित किया गया।

सुबह 4 बजे खुले पट, गूंजा “हरि ओम”

रविवार तड़के लगभग सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले। प्रथम घंटानाद के साथ “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के साकार एवं जागृत स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

परंपरा अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण से जुड़ी मान्यता

14/12/2025  l महाकाल भस्म श्रृंगार आरती  l Mahakal Aarti l MahakalTimes l #mahakal #ujjain #live

मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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