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आज की अहम झलकियाँ

  1. 12 जनवरी 2026 को भस्म, दध्योदक, भोग एवं संध्या आरती विधिवत संपन्न।
  2. रजत मुकुट, भस्म एवं पुष्पों से सजे बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार।
  3. प्रातः से संध्या तक भक्तों को दुर्लभ एवं दिव्य स्वरूपों के दर्शन।

 

उज्जैन, मध्य प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 12 जनवरी 2026 की तड़के सम्पन्न भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के अत्यंत दिव्य और जागृत स्वरूप के दर्शन हुए।

ब्रह्म मुहूर्त में गर्भगृह के पट खुलते ही “ॐ नमः शिवाय” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया।

परंपरा अनुसार सम्पन्न हुआ पंचामृत अभिषेक

विधि-विधान के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक सम्पन्न हुआ।

अभिषेक के उपरांत ज्योतिर्लिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई और कर्पूर आरती के साथ भस्म आरती संपन्न हुई।

रजत मुकुट, भस्म और पुष्पमालाओं से सजा ज्योतिर्लिंग

आज के भस्म आरती श्रृंगार में बाबा महाकाल रजत मुकुट, शेषनाग अलंकरण, रुद्राक्ष माला और भांग-चंदन से बने त्रिपुण्ड से सुसज्जित नजर आए।

श्वेत, गुलाबी और बैंगनी रंग के सुगंधित पुष्पों की मालाओं ने ज्योतिर्लिंग की दिव्यता को और निखार दिया। रजत अलंकरण और त्रिशूल चिह्न आज के श्रृंगार का विशेष आकर्षण रहे।

दध्योदक आरती में दिखा शांत और वैराग्यमय स्वरूप

प्रातःकालीन दध्योदक आरती में भगवान महाकाल का दही से अभिषेक किया गया। श्वेत दध्योदक की धाराओं के बीच त्रिपुण्ड अलंकरण अत्यंत प्रभावशाली दिखाई दिया।

श्वेत पुष्पमालाओं और मध्य में अर्पित लाल पुष्पों ने बाबा के शांत, गंभीर और सौम्य स्वरूप को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। मान्यता है कि इस आरती के दर्शन से शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त होती है।

भोग आरती में अन्नपूर्ण स्वरूप के दर्शन

मध्यान्ह काल में सम्पन्न भोग आरती के दौरान भगवान महाकाल को फल, मिष्ठान्न, अन्न और पारंपरिक व्यंजन अर्पित किए गए। लाल, केसरिया और पीले पुष्पों से सजा ज्योतिर्लिंग अन्नपूर्ण स्वरूप का साक्षात दर्शन करा रहा था।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भोग आरती के दर्शन से जीवन में अन्न, धन और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

संध्या आरती में करुणामय स्वरूप से हुआ दिन का समापन

संध्या आरती में बाबा महाकाल शांत और करुणामयी स्वरूप में विराजमान दिखाई दिए। भस्म, चंदन, त्रिपुण्ड और चंद्र-सोम अलंकरण से सजा ज्योतिर्लिंग भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव करा रहा था।

आरती के पश्चात “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं का मानना है कि संध्या आरती के दर्शन से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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