आज की अहम झलकियाँ
- 11 जनवरी 2026 को महाकाल मंदिर में चारों आरतियाँ विधिवत रूप से संपन्न हुईं।
- दिनभर अलग-अलग श्रृंगार में ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के दर्शन हुए।
- श्रद्धालुओं ने प्रत्येक आरती में महाकाल का विशिष्ट और दिव्य स्वरूप देखा।
उज्जैन, मध्य प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में 11 जनवरी 2026 को पूरे दिन पारंपरिक विधि-विधान के साथ आरतियों और श्रृंगार दर्शन का क्रम जारी रहा। तड़के भस्म आरती से लेकर संध्या आरती तक श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के अलग-अलग दिव्य स्वरूपों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
मंदिर में दिनभर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और प्रत्येक आरती के साथ भगवान महाकाल का स्वरूप भक्तों को आकर्षित करता रहा।
तड़के संपन्न हुई परंपरागत भस्म आरती
दिन की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में भस्म आरती के साथ हुई। विधि अनुसार ज्योतिर्लिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई, जो वैराग्य और काल तत्व का प्रतीक मानी जाती है। इस आरती में बाबा महाकाल का तेजस्वी और गंभीर स्वरूप श्रद्धालुओं के समक्ष प्रकट हुआ।
भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में गहन शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
प्रातःकालीन दद्योदक आरती में बदला स्वरूप
भस्म आरती के पश्चात प्रातःकालीन दद्योदक आरती संपन्न कराई गई। इस आरती में ज्योतिर्लिंग का नवीन श्रृंगार किया गया और पारंपरिक पूजन विधियों के साथ आराधना हुई।
सुबह के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और शांत, सौम्य स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन किए।
भोग आरती में अर्पित हुआ नैवेद्य
दोपहर के समय भोग आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को परंपरा अनुसार नैवेद्य अर्पित किया गया और ज्योतिर्लिंग को अलंकरण एवं पुष्पों से सजाया गया। पुजारियों ने सभी अनुष्ठान शास्त्रसम्मत विधि से संपन्न कराए।
संध्या आरती के साथ दिन का समापन
शाम को संध्या आरती के साथ दिनभर की आराधना का समापन हुआ। दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का सौम्य एवं दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के सामने आया।
संध्या आरती में मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर नजर आया।
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