आज की अहम झलकियाँ
- तड़के भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य, जागृत स्वरूप श्रद्धालुओं के समक्ष प्रकट हुआ।
- कमल अलंकरण, भस्म लेप और पुष्प श्रृंगार आज के विशेष आकर्षण रहे।
- गर्भगृह में “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
उज्जैन, मध्य प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के संपन्न हुई भस्म आरती के दौरान जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, श्रद्धालुओं के समक्ष बाबा महाकाल का अत्यंत सौम्य, जागृत और तेजस्वी स्वरूप प्रकट हुआ। अलसुबह की इस दिव्य बेला में संपूर्ण मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का विधिवत जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात पंचामृत अभिषेक और फिर पावन भस्म अर्पण की विधि संपन्न हुई। भस्म आरती का यह क्षण श्रद्धा, साधना और वैराग्य का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
आज के श्रृंगार में ज्योतिर्लिंग पर भस्म लेप के साथ विशेष अलंकरण किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर श्वेत और पीले पुष्पों से सजा भव्य पुष्प मुकुट अर्पित किया गया, जिसमें गुलाब और गेंदा पुष्प विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। शिवलिंग के अग्रभाग पर कमल पुष्प के साथ किया गया अलंकरण आज के दर्शन की विशिष्ट पहचान बना।
श्रृंगार के दौरान भगवान महाकाल के नेत्र, भृकुटि और मुखमंडल को चंदन एवं अरगजा से सजीव रूप दिया गया। शांत किंतु ओजस्वी भाव के साथ यह स्वरूप भक्तों को आत्मिक शांति और आस्था का अनुभव कराता रहा। ज्योतिर्लिंग के मध्य भाग में त्रिपुण्ड, शिवलिंग चिह्न और भस्म रेखाओं का संतुलित संयोजन किया गया। ज्योतिर्लिंग को चारों ओर से गुलाबी, श्वेत और बैंगनी रंग की लंबी पुष्प मालाओं से सजाया गया।
रजत आधार पर शेषनाग आकृति, रजत आभूषण और पारंपरिक अलंकरणों ने बाबा महाकाल के राजाधिराज स्वरूप को और अधिक भव्य बना दिया। गर्भगृह में दीप प्रज्वलन और धूप-दीप की सुगंध से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा।
भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल, मिष्ठान और नैवेद्य अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में विराजित अन्य देव प्रतिमाओं का भी विधिवत पूजन हुआ। आरती के दौरान गर्भगृह में गूंजते “हर हर महादेव” के जयघोष ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भस्म आरती दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा तथा आत्मिक बल का संचार होता है।
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