84 महादेव यात्रा उज्जैन की सबसे प्राचीन और शक्तिशाली आध्यात्मिक यात्राओं में से एक है। पूरी उज्जैनी में फैले ये 84 शिवालय उस दिव्य ऊर्जा के प्रतीक हैं, जो असुर दूषण के संहार के बाद भगवान शिव के शरीर से प्रकट हुई थी। यह कथा स्वयं शिव महापुराण में वर्णित है।
84 महादेव की उत्पत्ति – शिव महापुराण की कथा
शिव महापुराण के अनुसार दूषण नामक राक्षस को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की एक-एक बूंद से उसके 84 रूप उत्पन्न हो जाएँ।
भगवान शिव ने अपनी बहन श्री प्रिया (आज की क्षिप्रा नदी) से आग्रह किया कि वे जलरूप में प्रकट हों ताकि राक्षस का रक्त जल में मिलकर निष्क्रिय हो जाए। परंतु क्षिप्रा थोड़ी देर से पहुँचीं, और इसी कारण दूषण 84 रूपों में विभाजित हो गया।
चारों ओर भय और हाहाकार फैल गया। तभी क्षिप्रा ने अपने भाई शंकर पर पवित्र जल की वर्षा की, जिसके प्रभाव से—
- शिवजी के शरीर के 84 दिव्य खंड प्रकट हुए
- और प्रत्येक खंड ने दूषण के एक-एक रूप का संहार कर दिया
इन्हीं दिव्य रूपों का स्वरूप आगे चलकर उज्जैन में 84 महादेव के रूप में स्थापित हुआ।
पूरे विश्व में केवल उज्जैन ही एकमात्र स्थान है जहाँ सभी 84 महादेव विद्यमान हैं।
84 महादेव यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
स्कन्द पुराण के अनुसार—
- जीव 84 लाख योनियों का भ्रमण करने के बाद मानव जन्म पाता है
- इन 84 महादेवों के दर्शन करने से उन सभी योनियों में किए गए दोषों का क्षय होता है
- प्रलय के समय भी इन्हीं 84 महादेवों का अस्तित्व अक्षुण्ण रहने की मान्यता है
इस यात्रा को करने के प्रमुख समय
- श्रावण माह
- पुरुषोत्तम मास (अधिक मास)
- सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान
- व्यक्तिगत संकल्प, स्वास्थ्य, मानसिक–आध्यात्मिक शुद्धि के लिए
84 महादेव यात्रा की शुरुआत कहाँ से होती है?
यात्रा की पारंपरिक शुरुआत और समापन श्री अगस्त्येश्वर महादेव से होती है —
जो हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित संतोषी माता मंदिर परिसर में स्थित हैं।
यहीं से श्रद्धालु संपूर्ण प्राचीन उज्जैन की परिक्रमा आरम्भ करते हैं।
उज्जैन के 4 महामुख्य द्वारपाल महादेव
ये चारों महादेव उज्जैन की चार दिशाओं की रक्षा करते हैं—
| दिशा | द्वारपाल महादेव |
|---|---|
| पूर्व | श्री पिंगलेश्वर महादेव |
| दक्षिण | श्री कायावरोहणेश्वर महादेव |
| उत्तर | श्री बिल्वकेश्वर महादेव |
| पश्चिम | श्री दुर्दरेश्वर महादेव |
84 महादेव यात्रा की पूर्णता के लिए इन चारों के दर्शन आवश्यक माने जाते हैं।
क्षेत्रवार 84 महादेवों की संपूर्ण सूची
| क्षेत्र संख्या | क्षेत्र का नाम | ८४ महादेवों की सूची |
|---|---|---|
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१ |
हरसिद्धि मंदिर एवं क्षिप्रा नदी क्षेत्र | अगस्त्येश्वर महादेव, संगमेश्वर महादेव, कर्कोटेश्वर महादेव, स्वर्णज्वलेश्वर महादेव, ढूंढेश्वर महादेव, अरुणेश्वर महादेव, गुहेश्वर महादेव, पिशाचमुक्तेश्वर महादेव, ़डमरूकेश्वर महादेव, मनकामनेश्वर महादेव, कुक्कुटेश्वर महादेव, दुर्घटेश्वर महादेव, केदारेश्वर महादेव, प्रथुकेश्वर महादेव |
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२ |
महाकाल मंदिर क्षेत्र | अनादिकल्पेश्वर महादेव, त्रिविष्टेश्वर महादेव, चन्द्रादित्येश्वर महादेव, स्वप्नेश्वर महादेव, स्वर्णद्वारपालेश्वर महादेव |
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३ |
चक्रतीर्थ | आनंदेश्वर महादेव |
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४ |
कार्तिक चौक क्षेत्र | घंटेश्वर, रेवंतेश्वर, कुटुंबेश्वर, पुष्पदंतेश्वर, रूपेश्वर, अभिमुक्तेश्वर, लोकपालेश्वर, प्रयागेश्वर |
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५ |
ढाबा रोड – दानी गेट – खटीकवाड़ा – चक्रतीर्थ – बड़ा पुल | ब्रह्मेश्वर, कर्कटेश्वर, सुलेश्वर, विश्वेश्वर, ओंकारेश्वर, अभयेश्वर, सोमेश्वर, कपालेश्वर, इन्द्रेश्वर, जल्पेश्वर, वीरेश्वर |
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६ |
पिपलीनाका एवं गढ़कालिका क्षेत्र | पशुपतेश्वर, धनुषास्ट्रेश्वर, प्रयागेश्वर, नीलकंठेश्वर, सिंहेश्वर, हनुमंतेश्वर |
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७ |
नयापुरा – अंकपात – मंगलनाथ – कालभैरव – सिद्धनाथ | त्रिलोचनेश्वर, मार्कंडेश्वर, शिवेश्वर, कुसुमेश्वर, अक्रूरेश्वर, कुंडेश्वर, च्यवनेश्वर, जटेश्वर, अनकेश्वर, गंगेश्वर, उत्तरारेश्वर, अंगारेश्वर, बड़ेलेश्वर, सिद्धेश्वर, कन्थडेश्वर, लुम्पेश्वर, करभरेश्वर |
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८ |
आगर रोड – मकोडिया – जैथल | खंडेश्वर, पत्तेश्वर, दुर्दरेश्वर |
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९ |
सतीगेट – छत्री चौक – छोटा सराफा – नईपीठ – पटनी बाजार | रामेश्वर, नूपुरेश्वर, मातंगेश्वर, मेघनादेश्वर, स्थावरेश्वर, राजस्थानेश्वर, नागचंद्रेश्वर, प्रतिहारेश्वर, ईशानेश्वर, इंद्रद्युम्नेश्वर, कल्कलेश्वर, अप्सरेश्वर, सिद्धेश्वर, मुक्तेश्वर, महालयेश्वर, सौभाग्येश्वर |
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१० |
गंभीर डेम – अंबोदिया | बिल्वकेश्वर महादेव |
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११ |
त्रिवेणी → तपोभूमि → करोहण | कायावरोहणेश्वर महादेव |
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१२ |
फ्रीगंज पुल → मक्सी रोड → सिंथेटिक फैक्टरी क्षेत्र | पिंगलेश्वर महादेव |
84 महादेव यात्रा मात्र एक परिक्रमा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग है। यह यात्रा उन 84 लाख जीवन योनियों के कर्म–संस्कारों को शुद्ध करने का मार्ग बताती है, जिनसे गुजरकर मानव शरीर प्राप्त होता है।
उज्जैन की धरती पर फैले ये 84 शिवालय दिव्य ऊर्जाओं के केन्द्र हैं — और इन्हें पूर्ण करने वाला भक्त शिवकृपा, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान का वरदान प्राप्त करता है, जैसा कि कई प्राचीन ग्रंथों में वर्णित आध्यात्मिक तीर्थों के ऐतिहासिक महत्व में भी उल्लेख मिलता है।
84 महादेव यात्रा से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. 84 महादेव यात्रा कहाँ से शुरू होती है?
श्री अगस्त्येश्वर महादेव से — हरसिद्धि मंदिर के पीछे।
2. यात्रा में कुल कितने मंदिर शामिल हैं?
पूर्ण 84 शिवालय।
3. क्या 84 महादेव केवल उज्जैन में ही हैं?
हाँ, उज्जैन विश्व का एकमात्र स्थान है, जिसकी पुष्टि प्राचीन ग्रंथों और भारत के सांस्कृतिक धरोहर अभिलेख में भी मिलती है।
4. यात्रा का सबसे उत्तम समय कौन-सा है?
श्रावण, अधिक मास, या सिंहस्थ कुंभ के दौरान।
5. क्या यह यात्रा एक दिन में पूरी हो सकती है?
हाँ, यदि निरंतर चलें। कई भक्त इसे 3–5 दिनों में पूरा करते हैं।
उज्जैन के 84 महादेव की खोज करें
84 महादेव केवल मंदिर नहीं — बल्कि वह दिव्य ऊर्जा हैं जो दैत्य दूषण के संहार के समय भगवान शंकर के शरीर से प्रकट हुईं। उज्जैन विश्व का एकमात्र स्थान है जहाँ सभी 84 महादेव विद्यमान हैं।
महाकाल टाइम्स हिंदी –
- श्री अगस्तेश्वर महादेव : हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित; यात्रा यहीं से प्रारंभ होती है और यहीं पूर्ण होती है.
ये सभी लेख मिलकर “84 महादेव श्रृंखला” बनाते हैं — जो उज्जैनी की पवित्र धरा, पौराणिक कथा और आध्यात्मिक रहस्य को प्रकट करते हैं।



