मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारी को लेकर तेज़ी से काम कर रही है। अप्रैल 2025 में अधिकारियों ने पुष्टि की कि मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक चलेगा, जिसमें 3 शाही (अमृत) स्नान और 7 पर्व स्नान (मुख्य स्नान तिथियाँ) 9 अप्रैल से 8 मई के बीच रखे गए हैं। लगभग 60 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में लगभग 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
पिछले सिंहस्थ की तुलना में यह अवधि दोगुनी है, जिसके चलते विकास और सुरक्षा इंतज़ामों में भारी तेज़ी आई है। अधिकारियों ने कुल ₹15,751 करोड़ के 102 विकास कार्यों का खाका तैयार किया है, जिनमें से 75 महत्वपूर्ण परियोजनाओं (₹5,133 करोड़) को तेज़ी से पूरा करने के लिए विशेष “सिंहस्थ फंड” बनाया गया है।

कुंभ जैसा ही दृश्य सिंहस्थ में भी दिखता है—शिप्रा नदी के घाटों पर लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन नदी किनारे के घाटों और संबंधित ढांचे का विस्तार कर रहा है ताकि बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों को सुविधा मिल सके।
मुख्य उपलब्धियाँ और अनुमोदन (2023–2025)
मार्च 2024: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ तैयारियों पर पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने उज्जैन–इंदौर को “धार्मिक-आध्यात्मिक सर्किट” के रूप में विकसित करने और सभी योजनाओं की समीक्षा का निर्देश दिया।
दिसंबर 2024: राज्य कैबिनेट ने बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी—शिप्रा नदी के किनारे 29.21 किमी वॉकवे और 53 नए घाट (₹771 करोड़) तथा संतों के लिए विशेष घाटों का निर्माण। साथ ही कई सड़क परियोजनाओं को भी हरी झंडी मिली, जिसमें उज्जैन–इंदौर 4-लेन हाईवे (₹2,312 करोड़), इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (₹1,370 करोड़) और इंदौर–देपालपुर रोड (₹239 करोड़) शामिल हैं। दिसंबर मध्य में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री के साथ उज्जैन में तैयारियों की समीक्षा की और 2028 तक शिप्रा को पूरी तरह स्वच्छ बनाने पर सहमति जताई ताकि श्रद्धालु “शुद्ध जल में पवित्र स्नान” कर सकें।
जनवरी–फरवरी 2025: अपर मुख्य सचिव (नगरीय विकास) राजेश रजौरा ने 2 फरवरी को उज्जैन कलेक्टरेट में आपदा प्रबंधन अभ्यास की समीक्षा की। उन्होंने आदेश दिया कि शाही स्नान के दिनों में अधिकतम आपात प्रतिक्रिया समय 15 मिनट से अधिक न हो। इसके लिए मॉक ड्रिल, फायर पाइपलाइन, फायर-लेन और ट्रॉमा सेंटर अनिवार्य किए गए। साथ ही सिंहस्थ में 42,000 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की पुष्टि की गई।
7 मार्च 2025: राज्य कैबिनेट ने टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS)-8 से 11 को मंजूरी दी, जो 2,378 हेक्टेयर मेला क्षेत्र को कवर करती हैं। (यह स्थायी “कुंभ सिटी” विकसित करने के लिए लैंड-पूलिंग योजना का हिस्सा था।) 2025–26 के बजट में ₹2,005 करोड़ सिंहस्थ-विशेष विकास कार्यों के लिए अलग से स्वीकृत किए गए।
14 जून 2025: एमपी डीजीपी कैलाश मकवाना ने यूपी पुलिस सलाहकारों के साथ तकनीकी बैठक की। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में AI-सक्षम ट्रैफिक सिस्टम, ड्रोन निगरानी, फेशियल रिकॉग्निशन, साइबर-थ्रेट मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें उपयोग होंगी। GPS-आधारित शटल, रूट-गाइडेंस ऐप और बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन पर भी चर्चा हुई।
27 अगस्त 2025: कैबिनेट ने उज्जैन–इंदौर–पीथमपुर मेट्रो की DPR तैयारी को मंजूरी दी। पहले चरण में यह महाकालेश्वर (उज्जैन) से लवकुश स्क्वायर (इंदौर) को जोड़ेगी। DMRC को DPR का कार्य ₹9 लाख/किमी पर सौंपा गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाएँ

सरकार का फोकस सिंहस्थ-उपयुक्त ढांचे पर है—घाट, सड़कें, सुविधाएँ और सेवा-प्रणालियाँ। प्रमुख बिंदु:
घाट और घाट मार्ग
शनि मंदिर से नागदा तक 29.21 किमी का मार्ग और 53 नए घाट (₹771 करोड़) स्वीकृत। दोनों किनारों पर स्थायी बेसाल्ट-स्टोन घाट बनाए जाएंगे।
सड़क कनेक्टिविटी
उज्जैन–इंदौर हाईवे के साथ कई फीडर सड़कें विकसित की जा रही हैं। विभाजन आयुक्त संजय गुप्ता ने राजस्थान/गुजरात को जोड़ने वाले नए कॉरिडोर और इंदौर हवाईअड्डे से बेहतर कनेक्टिविटी की जानकारी दी।
जल प्रबंधन
शिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए सहायक नदियों पर बड़े कार्य हो रहे हैं—कान्ह डायवर्ज़न, सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी योजनाएँ, कुल लगभग 30 किमी बांध/चैनल, जो सिंहस्थ से पहले पूरे होंगे।
आश्रम और धर्मशालाएँ
हरिद्वार मॉडल पर साधुओं के लिए सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं—तंबू, शौचालय, चिकित्सा शिविर आदि।
तकनीक और निगरानी
AI सिस्टम, CCTV नेटवर्क, e-Vigilance ऐप, GPS-ट्रैक्ड एम्बुलेंस, हजारों कैमरे, ड्रोन—सब शामिल। गृह विभाग ने ₹75 करोड़ की टैबलेट खरीद पुलिस समन्वय के लिए की है।
सुरक्षा, प्रशिक्षण और भीड़ प्रबंधन
व्यापक प्रशिक्षण (नवंबर 2024)
CM ने 21 नवंबर 2024 को “डिजास्टर-फ्री सिंहस्थ” प्रशिक्षण का उद्घाटन किया। 18,000 कर्मियों ने भीड़ नियंत्रण, रिवर-रेस्क्यू, मेडिकल एड आदि का प्रशिक्षण शुरू किया।
नियमित अभ्यास
पुलिस, फायर, स्वास्थ्य, NDRF/SDRF द्वारा निरंतर मॉक ड्रिल—भगदड़, बाढ़, आग जैसे परिदृश्यों पर। रेलवे और ट्रैफिक विभाग मिलकर त्वरित निकासी मार्गों की तैयारी कर रहे हैं।
भीड़ का पूर्वानुमान
प्रयागराज मॉडल पर आधारित डेटा एनालिटिक्स से भीड़ का अनुमान। GPS-ट्रैक्ड बस रूट, “सेवा केंद्र” और 15 मिनट प्रतिक्रिया-समय मार्गदर्शक तय किए गए।
उज्जैन–इंदौर क्षेत्रीय विकास
धार्मिक-पर्यटन सर्किट
उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर को जोड़कर बड़ा आध्यात्मिक सर्किट विकसित किया जा रहा है।
मेट्रो रेल
47 किमी का उज्जैन–इंदौर मेट्रो कॉरिडोर—महाकालेश्वर से इंदौर—2025 के अंत तक काम शुरू होने की संभावना।
एयरपोर्ट और होटल
होटल क्षमता बढ़ाना, इंदौर एयरपोर्ट पर चार्टर उड़ानों की योजना, गाँवों में होम-स्टे, शहर में सफाई-प्रबंधन, और सिंहस्थ के दौरान अनुमानित 740 टन/दिन कचरे के निस्तारण की योजना।
सिंहस्थ में देश-विदेश से लाखों लोगों के आने की संभावना है। यह तैयारियाँ कुंभ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को भी रेखांकित करती हैं, जिसकी पहचान विश्व-स्तर पर है, और कई विद्वानों द्वारा इसे प्राचीन भारतीय तीर्थ परंपराओं की गहरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ा गया है।
सिंहस्थ कुंभ मेला: सामान्य प्रश्न (FAQ)
1. सिंहस्थ 2028 कब और कहाँ होगा?
27 मार्च – 27 मई 2028, उज्जैन (शिप्रा नदी के घाटों पर)।
2. कुल कितने स्नान दिन हैं?
3 शाही स्नान + 7 पर्व स्नान = कुल 10 प्रमुख स्नान तिथियाँ।
3. कितने श्रद्धालु आने की उम्मीद है?
लगभग 14 करोड़ लोग—प्रयागराज 2019 (12 करोड़/48 दिन) से भी ज्यादा।
4. बजट और प्रमुख परियोजनाएँ क्या हैं?
कुल 102 परियोजनाएँ (~₹15,751 करोड़)। सिंहस्थ-विशेष बजट (2025–26) ₹2,005 करोड़। प्रमुख कार्य: नए घाट (₹771 करोड़), उज्जैन–इंदौर हाईवे (₹2,312 करोड़), और उज्जैन–इंदौर मेट्रो तैयारी—इनमें से कई पहलें भारत के सांस्कृतिक संरक्षण संबंधी सरकारी अभिलेखों के अनुरूप विकसित की जा रही हैं।
5. सुरक्षा और आपदा प्रबंधन कैसे होगा?
18,000 कर्मियों का प्रशिक्षण, AI/ड्रोन निगरानी, 24×7 कंट्रोल रूम, तेज़ प्रतिक्रिया टीमें, 15 मिनट प्रतिक्रिया मानक।
6. कोई योजना बदली गई है?
हाँ। नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री ने स्थायी “कुंभ सिटी” के लिए लैंड-पूलिंग योजना रद्द कर दी, किसानों की आपत्ति के बाद। अब सभी व्यवस्थाएँ अस्थायी मॉडल पर होंगी।
7. सिंहस्थ तैयारियों की ज़िम्मेदारी किसके पास है?
सरकार ने आशीष सिंह को सिंहस्थ मेला अधिकारी नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री (जैसे जे.पी. नड्डा) स्वयं तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।
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