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क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हर महीने एक विशेष दिन घरों और मंदिरों में दीपों की पंक्तियाँ क्यों सजाई जाती हैं? यह कोई साधारण परंपरा नहीं, बल्कि कार्तिगै नक्षत्र से जुड़ा एक गहरा आध्यात्मिक संकेत है, जो अज्ञान के अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है।

कार्तिगै नक्षत्र दिवस (जिसे मासिक कार्तिगै या कृत्तिका नक्षत्र भी कहा जाता है) भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) के उपासकों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। विशेष रूप से शैव परंपरा और तमिल संस्कृति में इन दिनों का गहरा महत्व है।

इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम प्रस्तुत कर रहे हैं 2026 की सभी कार्तिगै नक्षत्र तिथियाँ, विशेष रूप से उज्जैन के पंचांग और सूर्योदय-आधारित गणनाओं के अनुसार। चाहे आप हर महीने मासिक कार्तिगै व्रत रखते हों या वार्षिक कार्तिगै दीपम की तैयारी कर रहे हों—यह लेख आपके लिए एक भरोसेमंद संदर्भ बनेगा।

कार्तिगै नक्षत्र क्या है?

कार्तिगै नक्षत्र उस समय होता है जब चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करता है। यह वैदिक ज्योतिष का तीसरा नक्षत्र है, जिसके अधिष्ठाता देव अग्नि माने जाते हैं। अग्नि तत्व शुद्धिकरण, तेज और ज्ञान का प्रतीक है।

धार्मिक दृष्टि से:

  • कृत्तिका नक्षत्र भगवान शिव के ज्योति स्वरूप से जुड़ा है
  • इसी नक्षत्र से भगवान कार्तिकेय का संबंध है, जिनका पालन-पोषण छह कृत्तिकाओं ने किया था

इसी कारण इन दिनों दीप प्रज्ज्वलन, शिव-पूजन और मंत्र-जप का विशेष महत्व है।

मासिक कार्तिगै का आध्यात्मिक महत्व

हर महीने आने वाला मासिक कार्तिगै भक्तों को आत्मिक शुद्धि और अंतःप्रकाश का अवसर देता है। दीप जलाना केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि भीतर के अज्ञान को मिटाने का प्रतीक है।

माना जाता है कि कार्तिगै के दिन:

  • नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है
  • मानसिक शांति और विवेक बढ़ता है
  • शिव की ज्योति से साधक का जीवन प्रकाशित होता है

उज्जैन, जहाँ भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित हैं, वहाँ इन दिनों का प्रभाव और भी गहन माना जाता है।

2026 की कार्तिगै नक्षत्र तिथियाँ (उज्जैन अनुसार)

नीचे दी गई तिथियाँ पारंपरिक पंचांग गणनाओं पर आधारित हैं, जो उज्जैन (मध्य प्रदेश) के स्थानीय समय और सूर्योदय को ध्यान में रखकर तय की गई हैं:

क्रम तारीख दिन पर्व / अवसर
1 27 जनवरी 2026 मंगलवार मासिक कार्तिगई
2 23 फ़रवरी 2026 सोमवार मासिक कार्तिगई
3 23 मार्च 2026 सोमवार मासिक कार्तिगई
4 19 अप्रैल 2026 रविवार मासिक कार्तिगई
5 16 मई 2026 शनिवार मासिक कार्तिगई
6 13 जून 2026 शनिवार मासिक कार्तिगई
7 10 जुलाई 2026 शुक्रवार मासिक कार्तिगई
8 7 अगस्त 2026 शुक्रवार मासिक कार्तिगई
9 3 सितंबर 2026 गुरुवार मासिक कार्तिगई
10 30 सितंबर 2026 बुधवार मासिक कार्तिगई
11 27 अक्टूबर 2026 मंगलवार मासिक कार्तिगई
12 24 नवंबर 2026 मंगलवार कार्तिगई दीपम
13 21 दिसंबर 2026 सोमवार मासिक कार्तिगई

अगर चाहें तो मैं इसमें तमिल कैलेंडर मास, नक्षत्र जानकारी, या पूजा विधि भी जोड़ सकता हूँ।

26 जनवरी 2026: वर्ष की पहली मासिक कार्तिगै

26 जनवरी 2026 को वर्ष की पहली मासिक कार्तिगै मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि इससे पूरे वर्ष की साधना का शुभारंभ होता है।

इस दिन आप:

  • संध्या समय एक दीपक अवश्य जलाएँ
  • “ॐ नमः शिवाय” का जप करें
  • शिव को ज्योति स्वरूप में ध्यान करें

उज्जैन के भक्तों के लिए यह दिन महाकाल की कालातीत ऊर्जा से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है।

कार्तिगै दीपम 2026: अनंत ज्योति का पर्व

24 नवंबर 2026 (मंगलवार) को मनाया जाने वाला कार्तिगै दीपम वर्ष का सबसे पवित्र और भव्य पर्व है।

शैव पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद को शांत करने के लिए अनंत अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर यह सिद्ध किया कि वे आदि-अनंत से परे हैं।

तमिलनाडु के तिरुवन्नामलै में अरुणाचल पर्वत पर जलाया जाने वाला महादीपम इस दिव्य घटना का प्रतीक है, जो मीलों दूर से दिखाई देता है।

कार्तिगै नक्षत्र पर कैसे करें पूजा?

  • घर की स्वच्छता करें
  • संध्या समय पारंपरिक मिट्टी के दीपक जलाएँ
  • दीप पूर्व दिशा या शिव प्रतीक के पास रखें
  • सात्विक भोजन या उपवास रखें
  • शिव और कार्तिकेय के मंत्रों का जप करें

ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

2026 की कार्तिगै नक्षत्र तिथियाँ भक्तों को हर महीने शिव की ज्योति से जुड़ने का अवसर देती हैं, और 24 नवंबर को आने वाला कार्तिगै दीपम इस साधना का शिखर है। उज्जैन में यह पर्व महाकाल की अनंत चेतना से सीधा संवाद बन जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1.2026 में कार्तिगै दीपम कब है?

24 नवंबर 2026 (मंगलवार) को।

2.क्या मासिक कार्तिगै हर महीने होती है?

हाँ, हर महीने कृत्तिका नक्षत्र के दिन।

3.कार्तिगै पर दीप जलाना क्यों जरूरी है?

यह अग्नि तत्व और शिव की ज्योति का प्रतीक है, जो अज्ञान को नष्ट करता है।

4.क्या यह पर्व केवल तमिलनाडु तक सीमित है?

नहीं, पूरे भारत में शैव भक्त इसे मानते हैं, विशेषकर उज्जैन जैसे शिव क्षेत्र में।

 

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