2026 इष्टि और अन्वाधान वैदिक परंपरा के वे महत्वपूर्ण अनुष्ठान हैं, जिनका पालन विशेष रूप से वैष्णव संप्रदाय में किया जाता है। ये अनुष्ठान हर पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) और अमावस्या (कृष्ण पक्ष) के आसपास निर्धारित क्रम में होते हैं—पहले अन्वाधान, उसके अगले दिन इष्टि। यह लेख 2026 के लिए सटीक तिथियों, व्रत–यज्ञ विधि, और धार्मिक महत्व को स्पष्ट, क्रमबद्ध और भ्रम-मुक्त रूप में प्रस्तुत करता है। (स्थान: नैनीताल, भारत)
इष्टि और अन्वाधान क्या हैं?
इष्टि एवं अन्वाधान श्रोत–स्मार्त परंपरा में वर्णित अग्नि-आधारित वैदिक कर्म हैं।
- अन्वाधान
इष्टि से एक दिन पूर्व किया जाने वाला संयम-प्रधान दिन। इस दिन उपवास, शुद्धाचार और यज्ञ-अग्नि की तैयारी की जाती है। यह आत्मसंयम और साधना का चरण है। - इष्टि
अन्वाधान के अगले दिन संपन्न होने वाला मुख्य यज्ञ। इसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अग्नि में आहुतियाँ दी जाती हैं और लोक-कल्याण, शुद्धि व समृद्धि की कामना की जाती है।
अनुक्रम अनिवार्य है: अन्वाधान → इष्टि। इसी क्रम से अनुष्ठान पूर्ण माना जाता है।
इष्टि–अन्वाधान पूजा का धार्मिक महत्व
- अग्नि (अग्निदेव) के माध्यम से दैवी संतुलन का प्रतीक।
- उपवास (अन्वाधान) के बाद यज्ञ (इष्टि) — संयम के बाद समर्पण का भाव।
- पूर्णिमा और अमावस्या की आध्यात्मिक शक्ति के साथ अनुष्ठान का फलवर्धन।
- वैष्णव परंपरा में विशेष मान्यता; अन्य सनातन परंपराओं में भी सम्मान।
2026 इष्टि और अन्वाधान तिथियाँ (विक्रम संवत 2082–2083)
स्थान: नैनीताल, भारत
नियम: हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से आरंभ व समाप्त माना जाता है।
जनवरी 2026
- अन्वाधान: 3 जनवरी (शनिवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 4 जनवरी (रविवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- अन्वाधान: 18 जनवरी (रविवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 19 जनवरी (सोमवार) — कृष्ण अमावस्या
फ़रवरी 2026
- अन्वाधान: 1 फ़रवरी (रविवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 2 फ़रवरी (सोमवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- अन्वाधान: 17 फ़रवरी (मंगलवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 18 फ़रवरी (बुधवार) — कृष्ण अमावस्या
मार्च 2026
- अन्वाधान: 3 मार्च (मंगलवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 4 मार्च (बुधवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- अन्वाधान: 18 मार्च (बुधवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 19 मार्च (गुरुवार) — कृष्ण अमावस्या
अप्रैल 2026
- अन्वाधान: 1 अप्रैल (बुधवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 2 अप्रैल (गुरुवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- अन्वाधान: 17 अप्रैल (शुक्रवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 18 अप्रैल (शनिवार) — कृष्ण अमावस्या
मई 2026
- अन्वाधान: 1 मई (शुक्रवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 2 मई (शनिवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- अन्वाधान: 16 मई (शनिवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 17 मई (रविवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 31 मई (रविवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 1 जून (सोमवार) — शुक्ल पूर्णिमा
जून 2026
- अन्वाधान: 14 जून (रविवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 15 जून (सोमवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 29 जून (सोमवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 30 जून (मंगलवार) — शुक्ल पूर्णिमा
जुलाई 2026
- अन्वाधान: 14 जुलाई (मंगलवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 15 जुलाई (बुधवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 29 जुलाई (बुधवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 30 जुलाई (गुरुवार) — शुक्ल पूर्णिमा
अगस्त 2026
- अन्वाधान: 12 अगस्त (बुधवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 13 अगस्त (गुरुवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 27 अगस्त (गुरुवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 28 अगस्त (शुक्रवार) — शुक्ल पूर्णिमा
सितंबर 2026
- अन्वाधान: 10 सितंबर (गुरुवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 11 सितंबर (शुक्रवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 26 सितंबर (शनिवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 27 सितंबर (रविवार) — शुक्ल पूर्णिमा
अक्टूबर 2026
- अन्वाधान: 10 अक्टूबर (शनिवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 11 अक्टूबर (रविवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 25 अक्टूबर (रविवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 26 अक्टूबर (सोमवार) — शुक्ल पूर्णिमा
नवंबर 2026
- अन्वाधान: 9 नवंबर (सोमवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 10 नवंबर (मंगलवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 24 नवंबर (मंगलवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 25 नवंबर (बुधवार) — शुक्ल पूर्णिमा
दिसंबर 2026
- अन्वाधान: 8 दिसंबर (मंगलवार) — कृष्ण अमावस्या
- इष्टि: 9 दिसंबर (बुधवार) — कृष्ण अमावस्या
- अन्वाधान: 23 दिसंबर (बुधवार) — शुक्ल पूर्णिमा
- इष्टि: 24 दिसंबर (गुरुवार) — शुक्ल पूर्णिमा
अन्वाधान व्रत और इष्टि यज्ञ के नियम
- अन्वाधान: दिन-भर उपवास, शुद्धाचार, मानसिक संयम।
- इष्टि: वैदिक विधि से यज्ञ, अग्नि में आहुतियाँ, मंत्रोच्चार।
- विधि, सामग्री और मंत्र परंपरा/आचार्य के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
2026 इष्टि और अन्वाधान का यह संपूर्ण कैलेंडर तिथियों, विधि और महत्व—तीनों को स्पष्ट करता है। सही क्रम में अन्वाधान उपवास और उसके बाद इष्टि यज्ञ करने से साधक वैदिक परंपरा के अनुरूप आध्यात्मिक संतुलन और पुण्य लाभ प्राप्त करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1.इष्टि और अन्वाधान में मुख्य अंतर क्या है?
अन्वाधान तैयारी और उपवास का दिन है, जबकि इष्टि मुख्य यज्ञ का दिन।
2.क्या ये दोनों पूर्णिमा और अमावस्या पर होते हैं?
हाँ, प्रत्येक चंद्रमास में शुक्ल पूर्णिमा और कृष्ण अमावस्या पर यह क्रम मिलता है।
3.इन्हें कौन-कौन कर सकता है?
मुख्यतः वैष्णव परंपरा में पालन होता है; अन्य सनातन अनुयायी भी आचार्य की सलाह से कर सकते हैं।
4.तिथियों में भ्रम क्यों होता है?
पंचांग गणना की विभिन्न पद्धतियों के कारण। यहाँ दी गई तिथियाँ व्यापक रूप से स्वीकार्य गणनाओं पर आधारित हैं।
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