महाकालेश्वर मंदिर की उत्पत्ति
छवियों का पुनःनिर्माण : Nano Banana द्वारा
महाकाल केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उज्जैन की आत्मा है — जिसकी जड़ें हज़ारों साल पुरानी हैं।
कथाओं के अनुसार, पुराणों के युग में भगवान शिव ने उज्जैन को अपना शाश्वत निवास चुना था।
स्कंद पुराण में वर्णित है कि जब दुष्ट दैत्य ‘दूषण’ ने उज्जैन में उत्पात मचाया, तब शिव स्वयं महाकाल रूप में प्रकट हुए और उसका अंत किया।
क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन भारत की सात मोक्षपुरी में से एक है — जहां मुक्ति का मार्ग खुलता है।
समय के साथ मंदिर ने अनेक रूप देखे — प्राचीन राजाओं से लेकर आधुनिक पुनर्निर्माण तक, हर युग ने अपनी छाप छोड़ी।
महाकाल मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा का केंद्र है — जहां रोज़ की भस्म आरती से लेकर भव्य सिंहस्थ कुंभ तक जीवन धड़कता है।
पत्थर की नक्काशियों, ऊँचे शिखर और गर्भगृह से झलकती है कालातीत भक्ति और उत्कृष्ट कला।
महाकाल हमें यह स्मरण कराते हैं कि समय भी शिव के चरणों में झुकता है — वे अनादि और अनंत हैं।
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